
गढ़ पैलेस स्थित शहर में साईं बाबा का एक ऐसा मंदिर है, जिसकी नींव एक छोटी सी प्रतिमा और अटूट श्रद्धा पर रखी गई थी. इस मंदिर की स्थापना की कहानी करीब पांच दशक पुरानी है. मंदिर से जुड़े चंद्र प्रकाश जेठी बताते हैं कि उनके पिताजी स्वर्गीय श्री बालू राम जेठी भारतीय सेना में कार्यरत थे. उनकी पोस्टिंग पुणे में थी और वर्ष 1978 में वे वहीं से सेवानिवृत्त हुए.
रिटायरमेंट के बाद वे अपने साथियों के साथ शिरडी दर्शन के लिए गए. उस समय शिरडी आज जितना विकसित नहीं था, बल्कि एक छोटा सा गांव हुआ करता था. वहीं से वे साईं बाबा की एक छोटी प्रतिमा अपने साथ कोटा ले आए. कोटा लौटने के बाद उन्होंने अपने घर के पास ही बाबा की प्रतिमा स्थापित की और प्रतिदिन श्रद्धा से दो अगरबत्ती जलाकर पूजा अर्चना शुरू कर दी.
धीरे धीरे बढ़ी आस्था
शुरुआत में यह एक साधारण पूजा स्थल था, लेकिन धीरे धीरे आसपास के लोग भी वहां आने लगे. आस्था का यह छोटा सा दीपक धीरे धीरे प्रकाश की तरह फैलने लगा. बढ़ती श्रद्धा को देखते हुए एक और छोटी प्रतिमा स्थापित की गई और नियमित रूप से पूजा पाठ का क्रम जारी रहा.
चमत्कार की घटना से बढ़ी मान्यता
मंदिर से जुड़ी एक घटना ने यहां की मान्यता को और मजबूत कर दिया. बताया जाता है कि अंदरगढ़ क्षेत्र में घूमने आए एक परिवार का बच्चा अचानक गुम हो गया. काफी तलाश के बाद भी जब बच्चा नहीं मिला तो किसी ने उन्हें साईं बाबा के मंदिर में प्रार्थना करने की सलाह दी. परिवार ने बाबा से विनती की और कुछ ही समय बाद बच्चा सुरक्षित मिल गया. इस घटना से प्रभावित होकर परिवार ने मंदिर निर्माण के लिए 3200 रुपए की दक्षिणा दी. इसी राशि से यहां एक छोटे मंदिर के निर्माण की शुरुआत हुई
भव्य मंदिर का स्वरूप
समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई. भक्तों की आस्था और सहयोग से मंदिर का विस्तार होता गया. साधारण पूजा स्थल से शुरू हुआ यह स्थान अब एक भव्य मंदिर का रूप ले चुका है. वर्ष 2002 में यहां साईं बाबा की बड़ी प्रतिमा स्थापित की गई, जिससे मंदिर की भव्यता और बढ़ गई.
लाइव आरती की विशेषता
आज यह मंदिर कोटा का पहला ऐसा साईं बाबा मंदिर माना जाता है, जहां लाइव आरती का प्रसारण भी किया जाता है. प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
