राजस्थान में बसा वृंदावन का जुड़वा, मिठड़ी गांव का भादी पीठ जहां मिलती है अद्भुत शांति

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राजस्थान के डीडवाना–कुचामन क्षेत्र में स्थित मिठड़ी गांव एक ऐसा स्थान है, जहां कदम रखते ही मन को शांति और दिल को सुकून मिलता है. इसी गांव में स्थित है श्री भादी पीठ मिठड़ी उप-वृंदावन धाम, जो भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और चमत्कारी मंदिर है. यह धाम श्रद्धालुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता है. भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए भी विशेष आकर्षण रखता है. शांत वातावरण और गहरी भक्ति भावना के कारण यहां आने वाला हर भक्त कुछ पल के लिए दुनिया की भागदौड़ भूल जाता है.

इस धाम को लोग प्रेम से उप-वृंदावन कहते हैं, क्योंकि यहां का माहौल और आस्था वृंदावन की याद दिलाती है. जन्माष्टमी, एकादशी और अन्य कृष्ण पर्वों पर मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं. भजन-कीर्तन और आरती के दौरान पूरा परिसर कृष्ण भक्ति में डूब जाता है. यही कारण है कि यह मंदिर वृंदावन का जुड़वा धार्मिक स्थल प्रतीत होता है.
चमकती मिट्टी है मंदिर की सबसे बड़ी खासियत
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां की अद्भुत मिट्टी है. कहा जाता है कि यह मिट्टी वृंदावन से लाई गई थी और इसी कारण यह दिन हो या रात, हमेशा चमकती रहती है. भक्त इस मिट्टी को अत्यंत पवित्र मानते हैं और इसे भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का प्रतीक समझते हैं. इसी अनोखी विशेषता के चलते इस धाम को उप-वृंदावन के नाम से जाना जाता है.

शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव
मंदिर परिसर में पहुंचते ही ऐसा महसूस होता है मानो मन की सारी थकान अपने आप दूर हो गई हो. चारों ओर फैली शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा हर आने वाले को भीतर तक छू जाती है. श्रद्धालु पूरे विश्वास के साथ भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में अपनी मनोकामनाएं रखते हैं और मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर प्रार्थना अवश्य पूरी होती है. भजन-कीर्तन, आरती और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है और ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं श्रीकृष्ण यहां विराजमान हों.

श्रद्धा और विश्वास का अनूठा संगम
मिठड़ी गांव का यह मंदिर श्रद्धा, चमत्कार और भक्ति का अनूठा संगम है. दिन-रात चमकती पावन मिट्टी और भगवान श्रीकृष्ण की उपासना इसे एक विशेष और दिव्य स्थान बनाती है. यही कारण है कि यह धाम आज श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बन चुका है और इसकी महिमा लगातार दूर-दूर तक फैलती जा रही है. गहरी श्रद्धा और अटूट विश्वास इस स्थान को बेहद खास बनाते हैं, इसलिए जो एक बार यहां आता है, वह बार-बार आने की इच्छा जरूर करता है.